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मुफ्त इलाज भी निकला जुमला, महंगी दवा खरीदनी पड़ रही: कुमारी सैलजा

प्रदेश के 11 जिलों में सरकारी अस्पतालों में दवाओं की भारी किल्लत:  

बुखार, खांसी, दर्द निवारक, एलर्जी समेत कोई दवा नहीं उपलब्ध

  अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री, हरियाणा कांग्रेस की पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवं उत्तराखंड की प्रभारी कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में लोगों को निशुल्क दवाएं उपलब्ध करवा कर मुफ्त इलाज करने का भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार का दावा भी जुमला ही साबित हुआ। इस समय प्रदेश के 11 जिलों में सरकारी अस्पतालों में दवाओं का जबरदस्त संकट बना हुआ है। बुखार, खांसी, दर्द निवारक व एलर्जी जैसी साधारण दवाएं भी मरीजों को नहीं मिल पा रही हैं।

मीडिया को जारी बयान में कुमारी सैलजा ने कहा कि मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना के तहत स्वास्थ्य मुख्यालय से जिला स्तर पर बजट जारी नहीं किया जा रहा है। इसकी वजह से लोकल लेवल दवाओं की खरीद भी नहीं हो पा रही है। दवाओं की आपूर्ति करने वाली एजेंसियों के सरकार की ओर करोड़ों रुपये बकाया है, जिसकी वजह से कई जगह इन्होंने पेमेंट के चक्कर में दवाओं की सप्लाई भी रोक दी है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 11 जिले ऐसे बताए जा रहे हैं, जहां डेढ़ महीने से सरकारी दवाओं का स्टॉक खाली हो चुका है। पीजीआईएमएस रोहतक में शुगर, एलर्जी, भूख लगने वाली दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। सोनीपत के नागरिक अस्पताल में 20 दिन से कफ सिरप, बीपी, कोलेस्ट्रॉल कम करने की दवा नहीं है। हार्ट के मरीजों के लिए जरूरी दवा भी खत्म हो चुकी है।

जींद में मनोचिकित्सा से संबंधित दवाएं नहीं हैं, तो झज्जर में दर्द निवारक दवाएं खत्म हैं।

कुमारी सैलजा ने कहा कि हिसार के नागरिक अस्पताल में बुखार, आयरन कैल्शियम, थायराइड, ओआरएस, एलर्जी की दवाओं के साथ ही बच्चों को बुखार में देने वाले सिरप भी मौजूद नहीं है।

पानीपत व कैथल जिले में भी करीब-करीब ऐसे ही हालात हैं। सिर्फ नागरिक अस्पताल ही नहीं, 11 जिलों की सीएचपी, पीएचसी से भी दवाएं नदारद हैं। इसकी वजह से यहां पहुंचने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों को मजबूरी में महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार की रूचि न होने के कारण जन औषधि केंद्र भी प्रदेश के सिर्फ 03 जिलों के सरकारी अस्पताल में ही खुल सके हैं। 08 साल के अंदर ही जेनेरिक दवा की इन सस्ती दुकानों में से 62 प्रतिशत तो बंद भी हो चुकी हैं।

हरियाणा में 2015 में जन औषधि केंद्र खोलने की शुरुआत हुई तो 08 साल में 93 केंद्र खुले, लेकिन इनमें से 58 बंद हो गए। करनाल, रोहतक व भिवानी जिले के सरकारी अस्पताल में ही जन औषधि केंद्र चल रहे हैं, बाकी जिलों में ये खुल भी नहीं सके।

कुमारी सैलजा ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के प्रति प्रदेश सरकार की बेरुखी से पता चलता है कि गरीब लोगों को महंगे इलाज के भरोसे छोड़ दिया गया है। सरकार चाहती है कि लोग निजी अस्पतालों में जाएं और

dawn punjab
Author: dawn punjab

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