बच्चों को भिक्षावृत्ति से मुक्त कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विभागों की संयुक्त बैठक
बच्चों के हाथों में भीख कटोरा नहीं, शिक्षा की किताब हो’ : तृप्ति हरिपाल श्योराण
पंचकूला : हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष सुश्री तृप्ति हरिपाल श्योराण की पहल पर चलाए जा रहे “भिक्षा नहीं, शिक्षा अभियान” के अंतर्गत बाल भिक्षावृत्ति एवं असुरक्षित परिस्थितियों में रह रहे बच्चों को बचाने तथा उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए आयोग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने तथा आगामी कार्रवाई की रूपरेखा तैयार करने के लिए आज एचएसवीपी भवन, सेक्टर-6, पंचकूला में समीक्षा एवं समन्वय बैठक आयोजित की गई।
अभियान के प्रथम दिन फील्ड कार्रवाई के दौरान भीख मांगते हुए एवं अन्य संवेदनशील परिस्थितियों में पाए गए बच्चों को रेस्क्यू किया गया। रेस्क्यू किए गए बच्चों का मेडिकल परीक्षण करवाकर उन्हें आगामी आवश्यक कानूनी कार्रवाई हेतु बाल कल्याण समिति पंचकूला के समक्ष प्रस्तुत किया गया। बैठक में जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, विशेष किशोर पुलिस इकाई (एसजेपीयू), एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति तथा श्रम विभाग सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य पंचकूला जिले में बाल भिक्षावृत्ति एवं बच्चों के शोषण से जुड़े संवेदनशील स्थानों की पहचान कर एक साथ विभिन्न स्थानों पर संयुक्त रेस्क्यू अभियान चलाना है। इसके लिए अलग-अलग फील्ड टीमों का गठन, पुलिस बल की उपलब्धता, रेस्क्यू किए गए बच्चों के पुनर्वास, मेडिकल सुविधा, कानूनी प्रक्रिया तथा शिक्षा से जोड़ने की व्यवस्था पर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया।
आयोग की अध्यक्ष ने अभियान में सभी संबंधित विभागों की सक्रिय भागीदारी एवं आपसी समन्वय सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि कोई भी बच्चा भीख मांगने, बाल श्रम, शोषण अथवा असुरक्षित परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर न हो। आयोग का उद्देश्य स्पष्ट है कि बच्चों के हाथों में भीख का कटोरा नहीं, बल्कि शिक्षा की किताब हो तथा प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर भविष्य का अवसर मिले।





